Sources and Types of Water | जल के स्रोत एवं प्रकार

Sources and Types of Water

प्राकृतिक स्रोतों में जल का सबसे अधिक महत्व है तथा पृथ्वी पर जल 75 प्रतिशत क्षेत्र को घेरे हुए है। जल के प्रमुख स्रोत निम्न प्रकार हैं-

(1) महासागर तथा समुद्री जल:- यह पानी खारा होता है इसलिए उपयोगी कम है. कुल पृथ्वी के जल का 93 प्रतिशत समुद्रों का है।

(2) नदियों का जल:- अपेक्षाकृत यह उपयोगी होता है।

(3) वर्षा का जल।

(4) झीलों और तालाबों का जल।

(5) कुओं नलों तवा नलकूपों का जल।

आज नदियों, कुओं, नलों और नलकूपों के जल का उपयोग पौधों की सिंचाई तथा घरेलू आवश्यकता के लिए उपयोग किया जाता है। Sources and Types of Water

Sources and Types of Water
Sources and Types of Water

जल के प्रकार

जल के निम्न प्रकार पाये जाते हैं-

  1. अधोभौमिक जल:- जल का कुछ भाग भूमि के द्वारा सोख लिया जाना है। पृथ्वी के जिन भागों में दरारे होती हैं वहाँ में रिस-रिसकर जल पृथ्वी के नीचे चला जाता है जिसे अधोभौमिक जल कहते हैं। यह अवशोषित जल पृथ्वी के नीचे अधोभौमिक जल के रूप में पाया जाता है जिस भूमि जल भी कहते हैं। हैण्डपाइपों, नलकूपों और कुओं द्वारा अधोभौमिक जल को पृथ्वी पर निकाला जाता है। Sources and Types of Water
  1. वर्षा का जल:- वर्षा के द्वारा प्राप्त जल को वर्षा का जल कहते हैं। अधिक तापमान के कारण समुद्रों का जल भाप बनकर वायुमण्डल में चला जाता है जहाँ वह मेच के रूप में रहता है। जब इन मेघों का भार वायु सहने में असमर्थ हो जाती है तो जल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आ जाता है। यह जल का सबसे शुद्ध रूप होता है। Sources and Types of Water
  2. नदी का जल:- नदी, समुद्र और तालाबों में वर्षा का जल ही पाया जाता है। पृथ्वी पर बहने वाली जल की धारा को नदी या सरिता कहते हैं। उत्तर भारत में बहने वाली सभी प्रमुख नदियाँ, जैसे-गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, घाघरा, गंडक, कोसी, चम्बल, सतलज, व्यास और गोमती पर्वतों की हिम से बैंकी चोटी से निकलने के कारण वर्षभर जल से भरी रहती हैं। दक्षिण भारत की नदियाँ-नर्मदा, ताप्ती, महानदी, गोदावरी एवं कृष्णा मुख्य हैं। नर्मदा और ताप्ती नदी पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरती हैं और अन्य नदियों बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। कुछ नदियाँ झीलों, झरनों व दलदली क्षेत्रों से ही निकलती हैं।

जल संरक्षण हेतु जागरूक लोगो का समूह बनाया जाना चाहिए औ इस समूह में परिवार के लोगों, मित्रों, पड़ोसियों को सम्मिलित कि जाना बाहिए।

भजन करते समय पानी के नल को खुला नहीं छोडना चाहिए अथवा मग का प्रयोग किया जाना चाहिए। नहाने के लिए शॉवर या बाथटब को उपयोग करने के स्थान पर बाल्टी व मग का उपयोग किया जाना चाहिए। बर्तनों को साफ करते समय निरंतर नल नहीं चलाना चाहिए बल्कि पानी से भरे बड़े बर्तन द्वारा जल का उपयोग बर्तनों को साफ करने में किया जाना चाहिए। Sources and Types of Water

घर के बगीचे में कम पानी की आवश्यकता वाले पौधों को ही लगाय जाना चाहिए। रसोईघर व स्नानघर से निकलने वाले पानी को पुन बगीचों में प्रयुक्त किया जाना चाहिए।

वर्षा के समय घर की छत पर एकत्रित जल को टैंक में एकत्रित किया जाना चाहिए और इस जल का उपयोग जल पुनर्भरण में किया जाना चाहिए।

उपयोग करने के बाद नल को ठीक ढंग से बन्द किया जाना चाहित नल से जल का रिसाव होने पर इसे तत्काल ठीक कराना चाहिए। Sources and Types of Water

Important Point

  • वर्षा जल भूमि तल पर स्थित शैलों में रिसकर अंदर जाता है। इस किया को पुनर्भरण कहते हैं।
  • समुद्र, झील, तालाब एवं खेतो आदि वाष्पित जल वायु में संघनित होकर बादलों के रूप में परिवर्तित हो जाता है। बादलों में संघनित यह जल वाष्प वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आ जाती है। धरती से जल पुनः सागरों में जाता है। इसी को जलीय चक्र कहते हैं।
  • जिन शैलों से होकर भूमिगत जल प्रवाहित होता है उन्हें जलभृत (जल से भरा) कहते हैं।

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